AIADMK – बीजेपी का गठबंधन, अवसरवादी और मजबूरी का गठबंधन?

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भारतीय जनता पार्टी ने दक्षिण भारत की राजनीति में कदम रख दिया है. अभी तक भाजपा का दक्षिण भारत में ज्यादा जनाधार नहीं रहा है और इसी को बदलने के लिए भाजपा ने अब दक्षिण भारत की एक बड़ी और महत्वपूर्ण पार्टी एआईएडीएमके के साथ आगामी लोकसभा चुनावों के लिए गठबंधन किया है. भाजपा राज्य में 5 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी. साथ ही पुदुचेरी में दोनों दल एक साथ चुनाव लड़ेगें. वहीं भाजपा तमिलनाडु में 21 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में एआईएडीएमके का समर्थन करेगी.

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने केंद्रीय रेल मंत्री पियूष गोयल को लोकसभा चुनावों के लिए तमिलनाडु का प्रभारी नियुक्त किया है. एआईएडीएमके के संयोजक और तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल के साथ इस गठबंधन की जानकारी मीडिया के सामने दी.

तमिलनाडु में व्यक्ति केंद्रित राजनीति

तमिलनाडु में व्यक्ति केंद्रित राजनीति होती रही है. दो दशक तक तमिलनाडु की राजनीति जयललिता और करुणानिधि के इर्द गिर्द घूमती थी. लेकिन इन दोनों नेताओं के देहांत के बाद राज्य में राजनैतिक शून्यता आ गयी जो अभी तक भर नहीं पाई है. इसी दौरान राज्य में दो नए नेताओं का जन्म तेजी से हुआ जिसमें रजनीकांत और कमल हासन है. रजनीकांत ने 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया. वहीं कमल हासन की पार्टी पहली बार जनता के बीच जाएगी, तो ऐसे में चुनावी दांव पेंच समझने में उन्हें समय लगेगा.

‘कमल खिलाने का सबसे अच्छा मौका’

भाजपा ने इस मौके का फायदा बखूबी उठाया है. भले ही उसे राज्य की 5 लोकसभा सीट ही मिली हो लेकिन उसे दक्षिण में दो नए साथी मिल गए है. दो इसलिए क्योंकि एआईएडीएमके ने कुछ ही दिनों पहले वेन्नियार की पार्टी पीएमके से गठबंधन किया है. पीएमके राज्य की 7 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. साथ ही केंद्र शासित क्षेत्र पुदुचेरी की सीट भी पीएमके के हिस्से में गई है. तो ऐसे में बीजेपी ने एक तरह से पीएमके के साथ भी गठबंधन कर ही लिया है.

तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके भी एक कीप्लेयर है. डीएमके कांग्रेस को समर्थन करती रही है. करुणानिधि के देहांत के बाद डीएमके में भी वर्चस्व की लड़ाई चली. लेकिन थोड़ी दिनों बाद ही यह बंद भी हो गई. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से सोमवार को कनिमोझी ने मुलाकात की थी और उन्हें 10 सीटों की ऑफर दिया था. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और डीएमके में गठबंधन फाइनल हो सकता है.

तमिलनाडू से 40 लोकसभा सांसद आते है. 2014 में मोदी लहर के बावजूद तमिलनाडु में एआईएडीएमके ने 37 सीटों पर जीत हासिल की थी. लेकिन जयललिता के देहांत के बाद एआईएडीएमके दो फाड़ में बटती चली गई. जिससे एआईएडीएमके को काफी नुकसान हुआ.

जयललिता के देहांत के बाद शशिकला ने पार्टी और मुख्यमंत्री की पोस्ट को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने की कोशिश की लेकिन वो इसमें सफल नहीं हो पाई. शशिकला उन लोगों में शुमार है, जो जयललिता के बेहद करीबी थी. शशिकला अभी भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद है.

शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरण ने इसके बाद एआईएडीएमके को टेकओवर करने की कोशिश की लेकिन वो भी इसमें सफल नहीं हो पाए. जिसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी एएमएमके बनाई. एआईएडीएमके के कई नेता दिनाकरण की पार्टी में शामिल हुए. टीटीवी दिनाकरण अभी आरके नगर विधानसभा सीटे से विधायक है. जयललिता इसी सीट से चुनाव लड़ा करती थी.

एआईएडीएमके – बीजेपी – पीएमके का गठबंधन तीनों पार्टी की मजबूरी है. इस गठबंधन से तीनों दलों को मजबूत होने का अवसर मिल जाएगा. और यही कारण है कि एआईएडीएमके जो 2014 में 37 जीतने में सफल हुई थी इस बार 12 सीटे अपने खाते से अपने सहयोगियों को देने के लिए राजी हो गई है.

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