मोदी सरकार का बड़ा कदम, जम्मू कश्मीर में हिजबुल के खात्मे के लिए जमात-ए-इस्लामी पर लगाया प्रतिबंध

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जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था. इस हमले में 40 जवान शहीद हुए थे. सेना पर हुआ यह अब तक का सबसे बड़ा हमला था. जांच एजेंसियों ने पाया कि पाकिस्तान इस हमले में सीधे तौर पर शामिल था. वहीं हमले की जिम्मेदारी जैश ने ली थी.

इस हमले के बाद जहां सेना ने सीमा पर मोर्चा संभाला तो मोदी सरकार ने सीमा के अंदर पाकिस्तान की वकालत करने वालों और आतंकियो को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी. बीते दो सप्ताह में करीब 500 से अधिक अलगाववादियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरूवार शाम सीसीएस की बैठक की जिसमें जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया. वहीं भारत सरकार से जुड़े सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि जमात-ए-इस्लामी संगठन घाटी में अलगाववाद और मजहबी कट्टरता बढ़ावा दे रहा था. साथ ही सरकार ने बताया कि 1953 से ही जमात-ए-इस्लामी ने अपना एक अलग संविधान बना लिया था.

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हिजबुल मुज्जाहिदीन का ही हिस्सा है जमात-ए-इस्लामी

भारत सरकार की माने तो जमात-ए-इस्लामी ही हिजबुल मुज्जाहिदीन के निर्माण के लिए जिम्मेदार है. हिजबुल मुज्जाहिदीन जम्मू कश्मीर में सबसे बड़ा आतंकी सगंठन है, जो इस समय सक्रिय है. हिजबुल मुज्जाहिदीन के लिए लड़ाको की भर्ती करना, हिजबुल को पैसा मुहैया कराना, हिजबुल को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने का काम, घाटी में जमात-ए-इस्लामी ही करता था. हिजबुल मुज्जाहिदीन, जमात-ए-इस्लामी का ही हिस्सा है.

उल्लेखनीय हो, 22 फरवरी को जम्मू कश्मीर पुलिस ने जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट और जमात-ए-इस्लामी के 150 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था. जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया था उसमें जमात-ए-इस्लामी का प्रमुख अब्दुल हामिद फयाज भी शामिल था. जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पुलिस के इस कदम का विरोध किया था.

जमात-ए-इस्लामी का गठन 

जमात-ए-इस्लामी का गठन 1942 में पीर सैदउद्दीन ने किया था. जमात-ए-इस्लामी अपने आपको एक सामाजिक और धार्मिक संगठन बताता रहा है. जमात-ए-इस्लामी कश्मीर की सियासत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. 1990 के दशक में जब कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था तब ऐसा माना जाता था कि जमात-ए-इस्लामी ही आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन को सपोर्ट मुहैया कराता था. जमात-ए-इस्लामी को घाटी में हिजबुल की राजनीतिक शाखा के तौर पर देखा जाता है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि सरकार यहीं नहीं रूकेगी और आने वाले दिनों में सरकार हुर्रियत पर भी प्रतिबंध लगा सकती है.

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