देश में रिकार्ड स्तर पर पहुंची बेरोजगारी दर- CMIE रिपोर्ट

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आम चुनावों से पहले बेरोजगारी के आकड़ो को लेकर आई सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट सरकार के लिए मुसीबत खड़ी तक सकती है. सीएमआईई की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में लगातार नौकरीपेशा लोग बेरोजगार हो रहे है.

रिपोर्ट की माने तो फरवरी 219 में बेरोजगारी दर का आकड़ा 7.2 फीसदी पहुंच गया जो साल 2016 के बाद सबसे ज्यादा है. वहीं बीते साल फरवरी में यह आकड़ा 5.9 फीसदी था. रिपोर्ट की माने तो फरवरी 2018 में 40.6 करोड़ लोग नौकरी कर रहे थे. वहीं इस साल फरवरी में यह आंकड़ा केवल 40 करोड़ रह गया. यानि एक साल में 60 लाख लोगों बेरोजगार हो गए हैं.

अर्थशास्त्री सीएमआईई को मानते है भरोसेमंद 

सीएमआईई जो आकड़ो जारी करती है उसे ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है. ज्यादातर अर्थशास्त्री सरकारी आकड़ो पर भरोसा करने की जगह इसके आकड़े पर विश्वास करते है. इस रिपोर्ट के आने के बाद मोदी सरकार की मुश्किले बढ़ सकती है. जहां विपक्षी पार्टियां बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेर रही थी. अब इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद वो मोदी सरकार पर और आक्रमक हो जाएंगी.

रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गा है कि पिछले एक साल में नौकरियां मिलने की संख्या 1.1 करोड़ कम हुई है. वहीं शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारों की संख्या 7.8 फीसदी रही. जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आकड़ा 5.3 फीसदी रहा.

उल्लेखनीय हो, बीते साल दिसंबर महिने में नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस की एक लीक रिपोर्ट का हवाला देते हुए एक अखबार ने लिखा था कि देश में बेरोजगारी दर बीते 45 सालों के बाद सबसे ज्यादा है. वहीं सरकार ने रिपोर्ट का खड़न किया था और कहा था कि बेरोजगारी दर मापने के पुराने तरीकों में बदलाव किया जाएगा. वहीं नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहेल ही इस्तीफा दे दिया था. दोनों ने सरकार पर रिपोर्ट ने छापने के लिए दवाब बानाने की बात कही थी.

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