‘डियर मोदी जी, आखिर कब तक राष्ट्रवाद का चोला पहनकर आप सवालों से भागते रहेंगें’

बीते 5 सालों में मोदी सरकार जब कभी, किसी मुद्दे पर घिरी है तो उसने राष्ट्रवाद को एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया है. राष्ट्रवाद, देशद्रोही, इसे पाकिस्तान चले जाना चाहिए ऐसे वाक्यों का प्रयोग मोदी सरकार के कार्यकाल में जितना हुआ है, भारत की आजादी के बाद शायद ही उतना हुआ हो.

0
149

गुरूवार को कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कांफ्रेंस कर पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा, जब देश शहीद जवानों के टुकड़े चुन रहा था, तब प्रधानमंत्री मोदी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे. कांग्रेस पार्टी के आरोपों का जवाब देने खुद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद आए. रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पार्टी के द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देने की जगह कांग्रेस पर आरोप लगाया कि कांग्रेस पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की भाषा बोल रही हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसा करके कांग्रेस ने देश की सेना का मनोबल गिराया है.

बीते 5 सालों में मोदी सरकार जब कभी, किसी मुद्दे पर घिरी है तो उसने राष्ट्रवाद को एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया है. राष्ट्रवाद, देशद्रोही, इसे पाकिस्तान चले जाना चाहिए ऐसे वाक्यों का प्रयोग मोदी सरकार के कार्यकाल में जितना हुआ है, भारत की आजादी के बाद शायद ही उतना हुआ हो.

पुलवामा आतंकी हमले में 40 जवानों को अपनी जान गवानी पड़ी. जब यह हमला हुआ उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह रैली कर रहे थे. शाम 6:00 बजे तक तस्वीर साफ हो चुकी थी, सीआरपीएफ के काफिले पर हुआ हमला कितना बड़ा है. लेकिन उसी रात दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी एक कार्यक्रम में गाना गा रहे थे. शाम 6:00 के बाद भी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह रैली कर रहे थे. आम तौर पर पीएम मोदी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं, लेकिन हमले की घटना से जुड़ा ट्वीट करने में उन्हें घंटों लग गए.

पुलवामा हमले के अगले दिन यानी 15 फरवरी को सीसीएस की बैठक बुलाई गई. सीसीएस की बैठक की आम तौर पर तस्वीरें सामने आती नहीं है, लेकिन इस बार बैठे की तस्वीर भी आई. बैठक सुबह 9:15 बजे शुरू होनी थी लेकिन यह 9:30 बजे के आसपास शुरू हुई. इसका कारण था कि इस बैठक में शामिल होने वाले मंत्री ही समय पर नहीं पहुंचे थे. सिर्फ केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह सही समय पर पहुंचे थे.

सीसीएस की बैठक के बाद पीएम मोदी ने 15 फरवरी को 2 रैलिया भी कि थी. वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई. पीएम मोदी ने रैली में आए लोगों को संबोधित किया, और अपनी सरकार की जमकर तारीफ की. लेकिन मीडिया के पीएम मोदी के भाषण से सिर्फ इतना दिखाया कि, मोदी ने पाकिस्तान को खुली चुनौती दि है. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पीएम मोदी की रैली के पीछे जो तर्क दिया उसे सही माना जा सकता है. रविशंकर प्रसाद ने इशारों में कहा कि, सरकार ऐसा संदेश नहीं देना चाहती थी कि देश आतंकी घटनाओं के सामने झुक गया, देश का विकास चलना चाहिए और हम आतंकियों के सामने नहीं झुकेंगे. मोदी सरकार ने यह संदेश दिया.

पुलवामा हमले में शहीद जवानों के पार्थिव शरीर को एक विशेष विमान के जरिए दिल्ली के पालम एयरपोर्ट लाया गया.  पालम एयरपोर्ट पर जवानों के ताबूत रखे थे, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण मौजूद थी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मौजूद थे, तीनों सेना प्रमुख मौजूद थे, बस इंतजार था तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का, क्योंकि पीएम अभी तक पहुंचे नहीं थे.

कांग्रेस ने पुलवामा हमले के दौरान काफी समझदारी से काम लिया. कांग्रेस ने अपने सारे राजनीतिक कार्यक्रम रद्द किए, साथ ही सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया. इससे मीडिया का वो तबका जो मोदी भक्ति में लीन रहता है उसे राहुल गांधी के खिलाफ चलाने के लिए कुछ नहीं मिला. लेकिन इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने अपना फोन का इस्तेमाल किया. मोदी भक्ति में लीन मीडिया ने इसे लपक लिया और इस तरह से दिखाया कि राहुल गांधी ने देश का अपमान किया है, उन्होंने सेना का अपमान किया. लेकिन उसी मीडिया ने यह नहीं बताया कि प्रधानमंत्री मोदी पालम एयरपोर्ट पर लेट पहुंचे थे क्योंकि वह रैली करके आ रहे थे.

हमले के वक्त पीएम मोदी शूटिंग में व्यस्त थे, गुरुवार को जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर छाने लगी, मोदी भक्ति में लीन मीडिया ने अपने आकाओं को खुश करने का तरीका खोज लिया. पीएम मोदी की छवि को कोई नुकसान ना हो इसके लिए एक खबर को आगे बढ़ाया गया. वह खबर थी कि पीएम मोदी ने हमले वाली रात खाना नहीं खाया. हमले वाली रात पीएम मोदी को नींद नहीं आई और वो देर रात 3:30 बजे उन्होंने एक बैठक करी जिसमें अजित डोभाल मौजूद थे.

मीडिया का एक ऐसा समूह भी था जिसने पुलवामा हमले के बाद ही सरकार से सवाल पूछने शुरू कर दिए. जिसक अंजमा उन्हें भुगतना पड़ा. ऐसे बुद्धीजीवी पत्रकार लोगों के निशाने पर आ गए. उन्हें गालियां दी गई, जान से मारने की धमकी दी गई, उन्हें देशद्रोही पत्रकार भी बताया गया.

इन सब के बीच कुछ सवाल ऐसे भी है जिसके जवाब मोदी सरकार को देना ही पड़ेगा. क्योंकि सरकार उनकी है. इसलिए उनकी देश की जनता के प्रति जवाबदेही है. मोदी पर देश को भरोसा है ऐसा कहकर वो बच नहीं सकते.

बीते 5 सालों में लगभग हर चुनावों में पाकिस्तान का ज्रिक किया गया. रैलियों में भाषण दिया गया अगर बीजेपी नहीं जीती तो पाकिस्तान में जश्म मनेगा. मोदी विरोध को देशविरोध बना दिया गया. और ऐसा करके बीजेपी ने मोदी सरकार से सवाल पूछने वालों को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया. उनको देशभक्ति साबित करने के लिए कहा गया.

पुलवामा हमले में 40 जवान शहीद हुए. जो जवान शहीद हुए वो किसी युद्ध में शदीह नहीं हुए या फिर आतंकियों से लोहा लेते हुए वो शहीद नहीं हुए है. उन्हें कारयता पुर्ण तरीके से आतंकियों ने मारा है. और यह हमारी सुरक्षा चूक का नतीजा भी है. घटना की जिम्मेदारी जैश ने ली है जिसका सरगना मसूद अजहर है और वो पाकिस्तान में बैठा हुआ है. लेकिन सवाल तो बनता है कि आखिर यह चूक हुई कैसे.

पुलवामा हमले पर भी कुछ सवाल हैं जिसका जवाब मोदी सरकार को देना ही होगा. क्योंकि देश में लोकतंत्र है जिसमें सबको सवाल पूछने का अधिकार है और जो जायज सवाल है उसे पूछना देशद्रोह नहीं होता.

  1. पहला सवाल तो यही है कि क्या पुलवामा हमारी सुरक्षा का नतीजा है, 
  2. दूसरा 42 जवानों की शहादत का जिम्मेदार कौन
  3. तीसरा बीजेपी क्या अपने उन नेताओं को कार्रवाई करेगी जो शहीदों की अंतिम यात्रा में हंसते हुए दिखाई दिए. क्या यह शहीदों का अपमान नहीं है. कुछ ऐसे भी नेता थे जो शहीदों के ताबूतों के साथ सेल्फी लेते दिखे
  4. आखिरी सवाल आखिर कब तक बीजेपी मोदी सरकार ने सवाल पूछने वालों को देशविरोधी करार देगी

दिल्ली में आम आदमी पार्टी से गठबंधन क्यों नहीं करना चाहती कांग्रेस ?

‘पैसों के लिए सोशल मीडिया पर किसी भी पार्टी के समर्थन में पोस्ट डालने को तैयार हुए कई नामी कलाकार’

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here