PRC – जिसकी वजह से जल रहा है अरूणाचल प्रदेश

अरूणाचल प्रदेश की सरकार 6 गैर-जनजाति समुदायों को स्थायी निवास प्रमाणपत्र देना चाहती है जिसका कई स्थानीय संगठन और आम जन विरोध कर रहे है. लोगों का यह विरोध हिंसक हुआ जिसमें कई जगह आगजनी हुई और मुख्यमंत्री के घर के बाहर भी धरना दिया गया जहां हिंसा भड़की जिसमें दो लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हुए थे.

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अरूणाचल प्रदेश में स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) को लेकर हुए प्रदर्शन हिंसक हुआ जिसमें दो लोगों की मौत हो गई. प्रदेश के सीएम पेमा खांडु ने मीडिया को बताया कि सरकार इस मुद्दे को आगे नहीं बढ़ाएगी. इस दौरान उन्होंने प्रदर्शन कारियों ने शांति बनाए रखने की अपील की.

अरूणाचल प्रदेश की सरकार 6 गैर-जनजाति समुदायों को स्थायी निवास प्रमाणपत्र देना चाहती है जिसका कई स्थानीय संगठन और आम जन विरोध कर रहे है. लोगों का यह विरोध हिंसक हुआ जिसमें कई जगह आगजनी हुई और मुख्यमंत्री के घर के बाहर भी धरना दिया गया जहां हिंसा भड़की जिसमें दो लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हुए थे.

प्रदेश के सीएम ने राज्य में हुई हिंसा की जांच के लिए कमिश्नर लेवल की एक जांच समीति का गठन किया है.

अरूणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में बीते कई दिनों ने कर्फ्यू लगा हुआ था. राज्य के उपमुख्यमंत्री चोवना मेन के घर को लोगों ने जलाने की कोशिश की. राज्य के डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर में प्रदर्शनकारियों के द्वारा तोड़फोड़ की गई. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार जिन 6 गैर-जनजाति समुदायों को पीआरसी देना चाहती है, वो नहीं दिया जाए.

अरूणाचल प्रदेश पहले असम का हिस्सा था, जिसे साल 1987 में अलग राज्य का दर्जा दिया गया. अरूणाचल प्रदेश के दो जिलों नामसाइ और छांगलांग में दशकों से देओरिस, सोनोवाल कचारी, मोरंस, आदिवासी, मिशिंग और गोरखा जनजाति के लोग रहते है. लेकिन यह लोग मूल तौर पर अरूणाचल प्रदेश के बाशिंदे नहीं है. ऐसे लोगों की तादाद 25 हजार से अधिक बताई जाती है.

इन लोगों के पास राज्य में अपनी जमीन तो है लेकिन उनके पास स्थायी निवास प्रमाण पत्र नहीं है. जिसके कारण इन लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सरकार ने मई 2018 में संयुक्त उच्चाधिकार समिति का गठन किया. समिति को जिम्मेदारी दी गई कि वो इन लोगों की परेशानिया का हल खोजे. समिति ने सरकार ने सिफारिश कि की इन लोगों को भी राज्य में स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी किया जाए.

समिति कि इन्ही सिफारिशों का विरोध होने शुरू हो गया. राज्य के कई छात्र सगंठनों और समाजाकि सगठनों से इसका विरोध किया. और गुरूवार से लेकर शानिवार कर बंद बुलाया. जिस दौरान हिंसा हुई.

राज्य के लोगों का मानना है कि अगर इन लोगों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र दे दिया गया तो राज्य में इसका व्यापक असर पड़ेगा. विरोध करने वालों लोगों का कहना है कि इससे राज्य में स्थानिय  लोगों के अधिकार कम हो जाएंगे और उनके हितों से समझौता होगा.

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